व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान Karoline Leavitt ने भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है और उसने पहले ही रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, ऐसे में वैश्विक तेल सप्लाई में आई अस्थायी कमी को देखते हुए भारत को रूसी तेल लेने की अनुमति दी गई।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब Iran से जुड़े हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है।
हालांकि इस बयान के बाद भारत की संप्रभुता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे मजबूत और स्वतंत्र देश अपने ऊर्जा संबंधी फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेता है, न कि किसी अन्य देश की अनुमति पर।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के इस संवेदनशील मुद्दे पर अब बहस तेज हो गई है कि क्या यह सिर्फ कूटनीतिक बयान है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है।