क्या वापसी की तैयारी में हैं Varun Gandhi? Narendra Modi से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल
साल 2009 में राजनीति में कदम रखने वाले Varun Gandhi ने पीलीभीत से सांसद बनकर अपनी पहचान बनाई। 2014 में उन्होंने सुल्तानपुर से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की, लेकिन उनकी असली पहचान उनके तीखे और विवादित बयानों से बनी।
पीलीभीत में दिए गए एक भाषण—जिसमें उन्होंने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा बयान दिया—के बाद वे तेजी से सुर्खियों में आए और हिंदुत्व के प्रमुख चेहरों में गिने जाने लगे।
इसी दौरान देश में Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हुई कि 2017 में भाजपा की जीत के बाद वरुण गांधी मुख्यमंत्री बन सकते हैं। प्रयागराज तक में उनके समर्थन में पोस्टर लगे, लेकिन अंततः मुख्यमंत्री बने Yogi Adityanath।
इसके बाद पार्टी संगठन में बदलाव हुए और Amit Shah के अध्यक्ष बनने के बाद वरुण गांधी की भूमिका धीरे-धीरे कम होती चली गई। 2019 में उन्हें स्टार प्रचारक सूची से बाहर रखा गया और पार्टी की कार्यकारिणी में भी जगह नहीं मिली।
2020 के बाद उन्होंने कई बार अपनी ही सरकार और नेताओं की खुलकर आलोचना की, जिसका असर यह हुआ कि 2024 के चुनाव में उनका टिकट काट दिया गया और वे राजनीतिक रूप से हाशिए पर चले गए।
हालांकि अब एक बार फिर उनकी Narendra Modi से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह मुलाकात उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत है या सिर्फ एक औपचारिक बैठक?
आने वाला समय इस सवाल का जवाब जरूर देगा।