बिलासपुर में ईसाफ माइक्रोफाइनेंस पर गंभीर आरोप, पूर्व मैनेजर ने प्रेस वार्ता में खोले राज
बिलासपुर। माइक्रोफाइनेंस कंपनी ईसाफ एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। कंपनी पर अपने ही मैनेजर के साथ आर्थिक धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। सक्ती जिले के निवासी एवं ईसाफ माइक्रोफाइनेंस कंपनी के पूर्व मैनेजर उपेंद्र नाथ चंद्रा ने बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मीडिया के सामने अपनी आपबीती रखी।
उपेंद्र नाथ चंद्रा ने बताया कि ईसाफ माइक्रोफाइनेंस कंपनी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को समूह लोन उपलब्ध कराती है, लेकिन कई मामलों में कंपनी प्रबंधन ने नियमों और मापदंडों की अनदेखी करते हुए लाभार्थियों की वास्तविक आय से कहीं अधिक राशि का लोन वितरित किया। इसका सीधा असर लोन रिकवरी पर पड़ा और समय पर वसूली नहीं हो सकी।
रिकवरी में असफलता के बाद कंपनी प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकारने के बजाय पूरा दबाव मैनेजरों पर डालना शुरू कर दिया। आरोप है कि कंपनी की ओर से फर्जी एंट्री कराई गई, जिसके आधार पर उपेंद्र नाथ को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। नौकरी जाने के डर और मानसिक दबाव में आकर उन्होंने अपने निजी संसाधनों से करीब 7 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा कराए।
पीड़ित मैनेजर का कहना है कि जब उन्होंने अपनी जमा की गई राशि वापस करने और एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) देने की मांग की, तो कंपनी ने उल्टा उनके खिलाफ फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर दिया और उनसे 2 लाख रुपये और जमा करने की मांग करने लगी। इस पूरे घटनाक्रम से उनका परिवार गहरे मानसिक तनाव में है।
प्रेस वार्ता के माध्यम से उपेंद्र नाथ चंद्रा ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो माइक्रोफाइनेंस कंपनियों द्वारा कर्मचारियों और आम जनता के शोषण का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में जबरन रिकवरी, फर्जी एंट्री और कर्मचारियों पर दबाव जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में कंपनियों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।