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शीतकालीन अवकाश में भी हाईकोर्ट की संवेदनशीलता ।
नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की अनुमति, 23 दिसंबर को होगा मेडिकल प्रोसीजर
रायपुर। दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग के गर्भपात से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीतकालीन अवकाश के दौरान भी विशेष अदालत लगाकर सुनवाई की। सोमवार को जस्टिस पी.पी. साहू की विशेष कोर्ट में मामले पर विचार किया गया और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के गर्भपात की अनुमति प्रदान की गई।
हाईकोर्ट ने रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल एवं पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया है कि 23 दिसंबर को विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में पीड़िता का गर्भपात कराया जाए। साथ ही भविष्य की कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
25 सप्ताह की गर्भवती पाई गई थी पीड़िता
मामला रायपुर जिले की एक नाबालिग लड़की से जुड़ा है। जब परिजनों को बच्ची के पेट के बढ़ते आकार पर संदेह हुआ, तब पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। चिकित्सकीय जांच में वह 25 सप्ताह की गर्भवती पाई गई।
अवकाश में भी गठित हुई विशेष अदालत
मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष कोर्ट गठित कर सुनवाई की। जस्टिस पी.पी. साहू ने पीड़िता के अभिभावक के माध्यम से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति दी।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं तय करे कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता की इच्छा सर्वोपरि है और उसकी याचिका स्वीकार की जाती है।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फैसला
हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को बीआर अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गर्भपात से पीड़िता को किसी भी प्रकार का गंभीर चिकित्सकीय खतरा नहीं है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा गर्भपात
अदालत ने निर्देश दिए कि गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 के तहत दो पंजीकृत चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराई जाए। पीड़िता को 23 दिसंबर को अस्पताल में उपस्थित होकर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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