देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर कर्मचारी को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
एक कर्मचारी, जो अपने पिता की ICU में सर्जरी करवा रहा था, मेडिकल लीव पर था—लेकिन स्थिति तब बदली जब उसने लीव बढ़ाने की गुज़ारिश की।
कर्मचारी के मुताबिक, HR ने दो विकल्प दिए:
👉 “10 महीने की सैलरी लो और इस्तीफा दे दो”
या
👉 “टर्मिनेशन स्वीकार करो”
7 साल से TCS में काम कर रहे इस कर्मचारी के पास कुल 14 साल का अनुभव था। वह एक अहम प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा था, लेकिन पिता की जान बचाने के लिए जब उसे छुट्टी चाहिए थी, तब कंपनी ने उसे मजबूर कर दिया। दबाव में उसने इस्तीफा दे दिया।
बाद में उसने लेबर ऑफिस में शिकायत की—तभी जाकर ग्रेच्युटी मिली।
FITE (Forum for IT Employees) ने भी इसे “TCS का काला सच” कहा और पूछा—
“कितने कर्मचारियों को इसी तरह resign करने पर मजबूर किया गया? कितने मेडिकल केस ignored हुए?”
AI और ऑटोमेशन के कारण इस साल हजारों कर्मचारियों की छंटनी के बीच यह घटना एक और सवाल खड़ा करती है—
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