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स्वदेशी चिकित्सा क्या है ?

*┈┉सनातन धर्म की जय,हिंदू ही सनातनी है┉┈*
*लेख क्र.-सधस/२०८१/माघ/शु./९-१६९३७*
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              *स्वदेशी चिकित्सा*
हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुए थे उनका नाम था महाऋषि वागभट्ट जी।

वे कहते हैं कि कभी भी हृदय घात हो रहा हैं, मतलब दिल की नलियों में ब्लॉकेज होना शुरू हो रहा हैं तो इसका मतलब हैं कि रक्त (ब्लड़) में एसिडिटी (अम्लता) बढ़ी हुई हैं।

अम्लता दो तरह की होती हैं, एक होती हैं पेट की अम्लता और एक होती हैं रक्त की अम्लता।

आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती हैं, तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही हैं, खट्टी-खट्टी डकार आ रही हैं। मुहँ से पानी निकल रहा हैं, और अगर ये अम्लता और बढ़ जाये तो हाइपर एसिडिटी होगी, और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती हैं तो रक्त अम्लता (ब्लड़ एसिडिटी) होती हैं।

और जब ब्लड़ में एसिडिटी बढ़ती हैं तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियो में से निकल नहीं पाता, और नलियो में ब्लॉकेज कर देता हैं। तभी दिल का दौरा होता हैं। इसके बिना दिल का दौरा नहीं होता। और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डॉक्टर आपको बताता नही, क्योकि इसका इलाज सबसे सरल हैं।

वागभट्ट जी लिखते हैं कि जब रक्त (ब्लड़) में अम्लता (एसिडिटी) बढ़ गई हैं। तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं। आप जानते है दो तरह की चीजे होती हैं।

अम्लीय और क्षारीय (एसिड़ और एल्काइन)

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो न्यूट्रल (उदासीन) होती हैं सब जानते हैं।

तो वागभट्ट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई हैं तो क्षारीय (एल्काइन) चीजे खाओं। तो रक्त की अम्लता (एसिडिटी) न्यूट्रल

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(उदासीन) हो जाएगी और रक्त में अम्लता न्यूट्रल (उदासीन) हो गई, तो दिल का दौरा की जिंदगी में कभी संभावना ही नही।

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Mukesh tiwari

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