बहुत ही चर्चा में हैं आज कल
श्री अभय सिंह उर्फ़ IIT बाबा..
कल तक गुमनामियों के अँधेरे में कहीं गुम थे!
परिवार की निराशा का केंद्र रहे होंगे!
सिर्फ एक मिनट की वायरल क्लिप से ओवरनाईट सेलिब्रिटी बन गए!
मुद्दा यहाँ वो नहीं है, मुद्दा ये है कि महाकुम्भ में लाखों संत कल्पवास पर हैं! अनेकों सन्यासी हैं देश में,फिर बाबा क्यों सनसनी बने?
बाबा का सन्यासी होना अधिक कौतूहल का विषय है, या बाबा की डिग्री हॉट टॉपिक है?
▪️इस प्रश्न का उत्तर जीवन की एक बड़ी सीख समाहित किये हुए है..
बाबा का IIT से इंजीनियरिंग जैसी डिग्री प्राप्त कर, लाभ के उच्च पदों पर कार्य करने के बाद उस सबका त्याग करना महत्वपूर्ण है!
▪️सब हासिल करने की क्षमता होने के बाद भी सब त्याग देना शिवत्व की श्रेणी में खड़ा कर देता है एक साधारण व्यक्ति को..
▪️शिव समस्त ब्रह्माण्ड में सब कुछ प्राप्त करने की क्षमता होते हुए भी, सर्वाधिक बली होते हुए भी सब त्याग वैराग्य धारण करते हैं,इसलिए ईश्वर हैं, उनका वैराग्य बहुमूल्य है!
▪️श्रीराम समस्त अयोध्या का राज्य अकेले हासिल करने की क्षमता होते हुए भी राज्य त्याग कर चले गए! उनका त्याग बहुमूल्य है...
समस्त सिंधु को एक बाण से सुखाने की क्षमता रखते हैं, फिर भी विनयशील हैं, इसलिए उनकी विनम्रता का मूल्य है..
▪️कहने का अर्थ यह है कि किसी भी व्यक्ति की सक्षमता ही उसके शेष कर्मों और निर्णयों की महत्ता का निर्धारण करती है!
*अतः पहला प्रयास स्वयं को सक्षम करने का होना चाहिए..*
शिक्षा अर्जित करें, शक्ति और संपत्ति अर्जित करें, जिससे कल सब छोड़ राम का नाम लें तो वह भी अर्थवान लगे!
दुर्बल और अक्षम व्यक्ति के सद्दकर्मों का भी कोई अर्थ नहीं इस समाज के लिए..
▪️बाबा आई आईटियन न हो कर दसवीं फेल होते तो “आता जाता कुछ नहीं तो चले हैं बाबागिरी करने” जितना ही अर्थ रह जाता उनके सन्यास का!
वैसे ही जैसे दुर्बल व्यक्ति की क्षमा का कोई अर्थ नहीं होता..
*क्षमा शोभती उस भुजंग को*
*जिसके पास गरल हो*
*उसको क्या जो दंतहीन*
*विषरहित, विनीत, सरल हो।*