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भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा पर्यावरण विभाग ,,



राष्ट्रीय अवकाश के दिन फर्जी बिल लगाकर खेला जा रहा है पर्यावरण विभाग में बड़ा खेल,,
पानी की सेंपल लेने के आड़ में लगाया परिवहन बिल,,

बिलासपुर में प्रकितिक संसाधनों की जो लूट मची है, इस लूट के पीछे पर्यावरण और पदूषण नियंत्रण बोर्ड का सबसे बड़ा हाथ है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का खुला खेल देखना हो तो इस विभाग के दस्तावेजों का अध्ययन किया जा सकता है। बिलासपुर पर्यावरण विभाग के भ्रष्टाचार से सम्बंधित कुछ दस्तावेज आरटीआई के द्वारा हाथ लगा है। जिससे विभाग द्वारा किया गया गोलमाल की जानकारी है। वही मिली जानकारी के अनुसार भ्रष्टाचार के तार बहुत ऊपर तक जुड़े होने की बात कही जा रही हैं। पर्यावरण विभाग के कर्मचारी फर्जी बिल लगाकर शासन को चुना लगा रहे है। आरटीआई से एक ऐसा दस्तावेज हाथ लगा है जिसमें विभाग के साइंटिस्ट परिवहन भत्ता बटोरने के लिए फर्जी बिल लगाकर 5 हजार रुपए का भुगतान ले लिया है।
बहुत से विभागों में शासकीय कर्मचारी सामान्य दिनों में तो काम नहीं करते है। लेकिन पर्यावरण विभाग के वैज्ञानिक इतने कर्मठ है की 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन मिलों सफर करके पानी का सैंपल लेने के लिए चले जाते है। यही नहीं विभाग के कर्मचारी ईंधन खर्च के रूप में पांच हजार रुपए का बिल प्रस्तुत कर पैसा भी स्वीकृत करा लेते है। विडंबना तो ये है की अधिकारी भी आंख मूंदकर राशि स्वीकृत कर देते है। जीहां जिस कर्मचारी की हम बात कर रहे है वह पर्यावरण विभाग में प्रयोगशाला परिचारक है और उसका नाम संजय मिश्रा है। संजय मिश्रा ने पानी का सैंपल लेने 15 अगस्त 2022 को चंद्रपुर गए थे और ईंधन खर्च के रूप में पांच हजार रुपए ले लिए। अब सवाल ये उठ रहा है जब पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मना रहा था तो एक प्रयोगशाला परिचारक ड्यूटी पे कैसे रह सकता है। विभागीय सूत्रों का कहना है की सैंपल लेने कोई कहीं नहीं गया था, फर्जी बिल लगाकर पैसा निकाला गया है। इसमें विभाग के अकाउंटेंट की भूमिका भी संदिग्ध है। सूत्र का तो ये भी कहना है की ज्यादातर टूर फर्जी ही होते है और अधिकारी फर्जी बिल लगाकर हर साल शासन को लाखों का चूना लगा रहे है। यदि जांच हो जाए तो लाखों का फर्जीवाड़ा सामने आ जाएगा। सवाल यह उठता है कि किस अधिकारी के आदेश पर संजय मिश्रा प्रयोगशाला सहायक ग्रेट टू वाटर सैंपल लेने चंद्रपुर गया था। कौन है वो पर्यावरण अधिकारी जो संजय मिश्रा के काले कारनामें को बचाने में लगा है। संजय मिश्रा के बचाने के पीछे इस अधिकारी का क्या मकसद है कही वह अधिकारी भी इस मामले में मिला हुआ तो नही है। जांच के बाद सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।फिर हाल आखिरकार तमाम पुख्ता सबूत होने के बावजूद दोषियों पर कार्यवाही कब होगी।

जब इस मामले पर जिम्मेदार अधिकारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन नही उठाया,,

पढ़ते रहिए पर्यावरण विभाग के भ्रष्टाचार की गाथा ,, अगले अंक में जल्द करेंगे बड़ी खुलासा,,

Mukesh tiwari

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