माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस यदि सही से जांच करे तो अंजलि को इंसाफ जरूर मिलेगा
ध्यान रहे कि मामले करे तहत जो तर्क पुलिस ने दिए हैं उनमें कहा गया है कि कंझावला, होशंबी बॉर्डर और अमन विहार इलाके से पीसीआर वैन बलेनो कार का पीछा करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन घने कोहरे के कारण ऐसा नहीं कर सकी. बताया ये भी गया था कि कार सवारों ने जब पुलिस को देखा वो दहशत में आ गए. और बचने के उद्देश्य से उन्होंने कार को मेन रोड के बजाए संकरी गलियों में मोड़ लिया.
माना जा रहा है कि घटना के बाद पुलिस को पहली पीसीआर कॉल 1 जनवरी की रात 2.30 बजे की गई. कॉल करने वाले ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद कार मौके से फरार हो गई. दूसरी पीसीआर कॉल, जो लगभग 3:30 बजे प्राप्त हुई, उसके जरिये पुलिस को सूचना मिली कि महिला का शव वाहन कार के नीचे फंसा हुआ है. अपने पक्ष में पुलिस ने ख़राब मौसम का हवाला भी दिया है और कहा है कि घने कोहरे और लो विजिबिलटी के कारण फोन करने वाला पुलिस को कार का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दे सका.
क्योंकि मामला एक महिला से जुड़ा था, वारदात न्यू ईयर को हुई थी पी सीआर को मिली जानकारी को आधार बनाते हुए रोहिणी जिले के चार एसीपी के तहत कार का पता लगाने, पीसीआर कॉल करने वालों से विवरण एकत्र करने और पीड़ित के साथ-साथ मामले में शामिल आरोपियों की पहचान करने के लिए कई टीमों को तैनात किया गया था. मामले को सुलझाने के लिए अमन विहार, प्रेम नगर, बेगमपुर और प्रशांत विहार की टीमों को लगाया गया था.
चूंकि मामले में अब तक जो तफ्तीश हुई है माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस 'बहुत कुछ' छिपा रही है. ऐसे में विशेष पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह ने कंझावला दुर्घटना से संबंधित केस फाइलों की जांच के लिए सुल्तानपुरी थाने का दौरा किया. मामला मीडिया में है इसलिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दिल्ली पुलिस से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
क्या ही फायदा होगा इस जांच से?
विशेष पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह अपनी रिपोर्ट में क्या लिखती हैं ये बात किसी से छिपी नहीं है. सोचने वाली बात ये है कि पुलिस अगर अपने ही विभाग की नाकामी की जांच में जुटेगी तो क्या निष्कर्ष निकलेगा. जैसा कि अब तक होता आया है, इस मामले में भी कुछ पुलिस कर्मियों को बलि का बकरा बनाया जाएगा. हो सकता है उन्हें थाने से ट्रेनिंग सेंटर या पुलिस लाइन भेज दिया जाए. पुलिस लाइन और ट्रेनिंग सेंटर्स से निकाल कर कुछ पुलिस वालों को थानों में पोस्टिंग दे दी जाए. हो सकता है कुछ लोग सस्पेंड भी हो जाएं लेकिन बड़ा सवाल यही रहेगा कि इस पूरी कवायद का नतीजा क्या निकलेगा? क्या इतने ड्रामे के बाद मृतक अंजलि को इंसाफ मिल पाएगा?
मामले के तहत पुलिस के लिए बेहतर यही रहेगा कि वो इसे और पेचीदा न बनाएं. इसकी निष्पक्ष जांच करें और जल्द से जल्द करें ताकि जो लोग भी इस घटना के जिम्मेदार हों उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले और पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ हो. घटना को ठीक ठाक दिन बीत चुके हैं. मामले को लेकर जैसा पुलिस का रवैया रहा है या तो वो अंधेरे में तीर चला रही है या फिर इसे और कॉम्प्लिकेट कर रही है.