एक बेटी की सबसे बड़ी क़ुरबानी...
MBBS डिग्रीधारी बेटी की सबसे बड़ी कुर्बानी,,,, रोहिणी के तीन छोटे बच्चे हैं, उनके पति समरेश सिंह सिंगापुर कि एक बड़ी कंपनी एवरकोर पार्टनर्स में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
ऐसी परिस्थिति में कोई अपनी किडनी अपने जर्जर हो चुके 75 साल के बूढ़े पिता को दे तो यह साहस सिर्फ और सिर्फ बेटियां ही कर सकती हैं।
रोहिणी ने कहा कि "पापा के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं, मैं तो अभी सिर्फ अपने शरीर का मांस ही दे रही हूं।" अपनी बेटी के साहस और ज़िद के आगे लालू प्रसाद यादव हार गए।
दरअसल बेटियों के रहते बेटे की चाहत में बच्चे पैदा करते लोगों के लिए भी यह एक सबक है कि बेटियां ही अधिक विश्वसनीय हैं, बेटे भी होते हैं मगर बेटी को पराई समझ लेना को मुर्खता से अधिक कुछ भी नहीं है।
सुनामी छत्तीसगढ़ मीडिया आपको सलाम करता है बहुत बहुत बधाई Rohini acharya अपने पिता को दूसरा जन्म देने के लिए। विश्व की सारी बेटियां आप पर गर्व कर रहीं होंगी।
#RohiniAcharya आप सभी नए पीढ़ी के युवाओं के लिए हमेशा प्रेणास्रोत रहेंगी रोहिणी आचार्य.
आपको दिल से सलाम ❤️#BeALifeSaver
Blood Donors #BeALifeSaveर