कत्थक नृत्य मे प्रथम स्थान हासिल कर प्राख्या ने माता,पिता और गुरु की बढ़ाई मान,, प्राख्या को कला विद्वान से किया गया सम्मानित,,
कहते हैं, एक जिद पूरी दुनिया को बदल देती है जी हां ऐसी ही एक जिद से बिलासपुर की एक छात्रा ने, इन्ही हौसलों के दम पर लोहा मनवाया है।
हौसलो के दम पर हर चुनौती को स्वीकार करते सफलता के शिखर तक पहुंच कर अपने गुरु और माता,पिता का नाम रौशन किया है।
पत्रकार पंकज खंडेलवाल की बेटी प्राख्या खंडेलवाल ने राष्ट्रीय स्तर की कथक नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिला सहित छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया है। साई नृत्य निलयम द्वारा आयोजित 4 दिवसीय कार्यक्रम प्रणवम 22 में प्राख्या ने यह उपलब्धि हासिल की है। प्राख्या को इसके पहले भी कई बार नृत्य स्पर्धाओं में पुरुस्कार मिल चुका है।
इनकी माता मयूरी खंडेलवाल और पिता पंकज खंडेलवाल ने बचपन में ही इनके नृत्य के प्रति गहरी रुचि को पहचानते हुए इन्हे महज चार वर्ष की उम्र से ही नृत्य गुरु बासंती वैष्णव के सानिध्य में भेजा। वर्तमान में वह कत्थक नृत्य की शिक्षा उन्हीं से हासिल कर रहीं हैं। बासंती वैष्णव ने बताया कि भारतीय नृत्य विशेष कर कत्थक नृत्य को भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय है। कत्थक नृत्य शुद्ध शास्त्रीय शैली है। देश की यह गौरवशाली धरोहर हैं। जिसमें पारंगत होकर प्राख्या इसे अगली पीढ़ी तक ले जाने में मेहनत कर रही हैं। उन्होने कहा कि हमें अपने बच्चों को भारत की सांस्कृतिक धरोहर को जानने समझने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। आपको बताते चलें की साई नृत्य निलयम द्वारा आयोजित 4 दिवसीय कार्यक्रम प्रणवम 22 का शनिवार को अंतिम दिन प्रातः 8 बजे से प्रारंभ हो कर रात 11 बजे तक चला। इस कार्यक्रम का आरंभ 1 सितंबर 22 को इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय कोनी के CARS ऑडिटोरियम में हुआ था। प्रतिदिन की भांति कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़, भिलाई, राउरकेला से सभी प्रतिभागी उपस्थिति रहे। मंच पर 4 युगल, 4 ग्रुप, 83 एकल नृत्य की प्रस्तुति सभी आयु वर्ग के कलाकारों ने दी। शहर में आयोजित यह पहला कार्यक्रम है जहां 7 राज्यों से 500 से अधिक कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाया। इन 4 दिनों में विश्वविद्यालय प्रांगण घुंगरू, तबला, शास्त्रीय गीतों की गूंज रही। अंतिम दिन कथक, ओडिसी, भरतनाट्यम, कुचीपुड़ी, मोहिनीअट्टम, सेमी क्लासिकल, वेस्टर्न नृत्य से समा बांधा। इस दिन गुरु वासंती वैष्णव, सुनील वैष्णव, गुरु राखी रॉय, मोरध्वज वैष्णव, चेतन बोरकर, पुष्पा मारकंडे उपस्थित रहे तथा उन्हें कला विद्वान से सम्मानित किया गया।
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