नर्सिंग होम एक्ट के तहत हर अस्पताल को इलाज के एवज में लिए जाने वाले सभी प्रकार के शुल्क का बोर्ड चस्पा करना होता है। लेकिन नाममात्र के अस्पतालों में इस तरह के बोर्ड लगाए गए हैं। ज्यादातर अस्पताल में बोर्ड चस्पा नहीं होने से मरीजों को शुल्क का पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में मनमाने ढंग से मरीजों से रुपये लेने की आशंका बनी हुई है। वहीं अब इन आशंकाओं को दूर करने के लिए ही हर निजी अस्पताल में शुल्क बोर्ड चस्पा करने का निर्देश सीएमएचओ ने दिए हैं, ताकि इलाज में लिए जाने वाले शुल्क पर पारदर्शिता बनी रहे।
जिले में 153 बड़े निजी अस्पतालों के साथ ही 350 से ज्यादा क्लीनिक संचालित होते हैं। वहां रोजाना मरीज पहुंचते हैं। जहां पर ओपीडी भी रोजाना लगता है। साथ ही कई प्रकार की चिकित्सकीय जांच की सुविधा रहती है। लेकिन अस्पतालों में ओपीडी शुल्क कितना है चिकित्सकीय मशीनों से जांच करने पर कितना शुल्क लिया जाता है, इसके जानकारी शुरुआत में मरीजों को नहीं मिल पाती है और जांच आदि के बाद अंतिम में बिल थमा दिया जाता है। ऐसे में शुल्क लेने में पारदर्शिता नहीं बरती जाती है।
ऐसे में मरीजों से उपचार के नाम पर ज्यादा शुल्क लेने की आशंका बनी रहती है। वहीं अब इन बातों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिक को पत्र व्यवहार कर शुल्क का बोर्ड चस्पा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह भी साफ किया गया है कि आने वाले दिनों में अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। उस दौरान लिए जाने वाले शुल्क का बोर्ड चस्पा नहीं मिला तो स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ेगा।आए दिन लोग स्वास्थ्य विभाग पहुंचते हैं, जहां उनकी यह ही शिकायत रहती है कि उपचार के नाम पर निजी अस्पताल में ज्यादा रुपये ले लिए गए। बार-बार इस तरह की मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ही हर अस्पताल में शुल्क बोर्ड चस्पा करने का निर्देश दिया गया है।
जिले में विभिन्न् प्रकार के चिकित्सकीय जांच के लिए निजी सेंटर और पैथोलाजी भी संचालित हो रहे हैं। वहां पर विभिन्न् प्रकार के टेस्ट के साथ एक्सरे, सीटीस्केन, एमआरआइ, सोनोग्राफी आदि जांच होती हैं। ऐसे में इन जांच के शुल्क को चस्पा करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग ने दिए हैं।