93 वर्षीय किसान को सरकारी रिकॉर्ड में 2021 से मृत घोषित करने का मामला, अपर कलेक्टर के दरबार में पहुंची फरियाद
मऊगंज। मऊगंज जिले में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब 93 वर्षीय एक किसान का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में उसे वर्ष 2021 से मृत दर्ज कर दिया गया है, जबकि वह आज भी जीवित है। रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद किसान अपने अधिकारों को बहाल कराने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
बताया जा रहा है कि किसान ने हाल ही में मऊगंज अपर कलेक्टर के समक्ष पहुंचकर अपनी समस्या रखी। किसान ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहा कि सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत बताया जा रहा है, जबकि वह जीवित है और अपने रोजमर्रा के जीवन के साथ-साथ अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।
मृत्यु प्रमाण पत्र किसने और कैसे जारी कराया?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसान को मृत घोषित करने वाला रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार हुआ। यदि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है तो उसके लिए आवेदन किसने किया, मृत्यु की सूचना किसने दी और संबंधित स्तर पर उसका सत्यापन कैसे हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वर्ष 2021 में किसान की मृत्यु दर्ज करते समय संबंधित दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया गया था या नहीं।
जमीन और सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज किए जाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसका असर उसकी जमीन, खसरा-खतौनी, विरासत संबंधी अधिकारों, बैंकिंग और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है।
यदि जांच में किसान का दावा सही पाया जाता है तो यह महज रिकॉर्ड में हुई सामान्य त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला माना जा सकता है। ऐसे में रिकॉर्ड में सुधार के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच भी आवश्यक होगी।
जांच में सामने आने चाहिए ये सवाल
- किसान को वर्ष 2021 में मृत किस रिकॉर्ड के आधार पर दर्ज किया गया?
- मृत्यु प्रमाण पत्र किस स्तर से जारी हुआ?
- मृत्यु की सूचना देने वाला व्यक्ति कौन था?
- क्या मौके पर सत्यापन किया गया था?
- राजस्व रिकॉर्ड में किसान की मृत्यु दर्ज करने से पहले दस्तावेजों का मिलान क्यों नहीं हुआ?
- क्या इस रिकॉर्ड के आधार पर जमीन या किसी अन्य संपत्ति में नामांतरण हुआ?
- क्या किसी व्यक्ति को इससे आर्थिक या अन्य लाभ मिला?
फिलहाल मामला अपर कलेक्टर के समक्ष पहुंच चुका है। अब संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 93 वर्षीय जीवित किसान को सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज किए जाने के पीछे सिर्फ रिकॉर्ड की त्रुटि थी या किसी स्तर पर गंभीर लापरवाही अथवा गड़बड़ी हुई।