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तुरतुरिया मेला के दूसरे दिन 1लाख से अधिक लोगों ने किये माता के दर्शन ......

तुरतुरिया मेला के दूसरे दिन 1लाख से अधिक लोगों ने किये माता के दर्शन ......

कसडोल। प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल तुरतुरिया मेला में दूसरे दिन करीब एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ देखने को मिला । प्रति वर्ष पौष पूर्णिमा को होने वाले मेला का शुभारंभ गुरुवार को किया गया था  जहां पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता गढ़ में माता का दर्शन किये वही दूसरे दिन पहाड़ा वाली माता का दर्शन करने लोगों की काफी भीड़ उमड़ पड़ी ।
       विकास खण्ड मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बारनवापारा अभ्यारण्य से लगा हुआ लवकुश की जन्म स्थली तुरतुरिया है जहाँ प्रति वर्ष पौष पूर्णिमा को तीन दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता है  इस बार यहाँ 5 दिसंबर से 7 दिसंबर तक मेला का आयोजन किया गया है जिसका शुभारंभ गुरुवार को हुआ । 
     यहां ऊंचे पहाड़ में विराजित माता काली को सन्तानदात्री के रूप में जाना जाता है जहाँ पहुचकर लोग सन्तान प्राप्ति सहित अन्य मन्नते मांगते है और पूरी होने पर दूसरे वर्ष पहुचकर चढ़ावा आदि चढ़ाते हैं । वही नीचे बाल्मीकि आश्रम व लवकुश की जन्मस्थली है पर माता सीता के साथ लवकुश का मंदिर है वही पास में ही गोमुख से निरंतर बहने वाली झरना है जो बारहों महिने तुरतुर की ध्वनि के साथ बहते रहने के कारण इस स्थान का नाम तुरतुरिया पड़ना बताया जाता है ।बताया जाता है कि इस झरने में पौष पूर्णिमा के दिन स्नान करने से साल भर किसी भी प्रकार की रोगों से मुक्ति मिल जाती है । इस गौमुख के झरने में नहाने शुक्रवार सुबह से ही काफी भीड़ लगी रही वही स्नान पश्चात लोग पहाड़ में विराजित माता रानी का दर्शन किये ।इसका ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं पौराणिक महत्त्व है। तुरतुरिया के विषय में कहा जाता है कि श्रीराम द्वारा त्याग दिये जाने पर माता सीता ने इसी स्थान पर वाल्मीकि आश्रम में आश्रय लिया था। उसके बाद लव-कुश का भी जन्म यहीं पर हुआ था। रामायण के रचियता महर्षि वाल्मीकि का आश्रम होने के कारण यह स्थान तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यहां बारंगा पठार से बहने वाली नदी जिसे बालम देही के नाम से जाना जाता है इसी आस पास मेला लगता है ।
       उल्लेखनीय है कि यहाँ पहुचने के लिए लोगों को अपने साधन से जाना पड़ता है यहां जाने वाले लोग मोटर गाड़ी या अन्य साधनों में अपने से व्यवस्था करके जाते हैं यहां पहुचने के लिए कसडोल से ठाकुरदिया तक रास्ता कुछ ठीक है तथा ठाकुरदिया से तुरतुरिया तक ऊबड़खाबड़ रास्तो से गुजर कर जाना पड़ता है । वही   इसके बावजूद लोगो की भारी भीड़ इस तीन दिवसीय मेले में देखने को मिलता है ।
      

Mukesh tiwari

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