इस अवसर में साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर दीप्ति धुरंधर ने बच्चो को जानकारी देते हुए कहा कि,मुंह से झाग निकलना, चक्कर आना, शरीर में जकड़न और बेहोशी जैसे लक्षण मिर्गी की ओर इशारा करते हैं. मिर्गी ब्रेन से जुड़ा एक क्रोनिक रोग है, जिसमें व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं. ब्रेन की सेल्स में अचानक और असामान्य रूप से केमिकल रिएक्शन होने के कारण दौरा पड़ने लगता है, जिस वजह से व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. मिर्गी रोग किसी को भी हो सकता है. यदि समय रहते इसका इलाज कराया जाए तो इससे छुटकारा पाया जा सकता है. लेकिन अभी भी भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मिर्गी को तंत्रमंत्र और जादू टोने से ठीक करने की कोशिश की जाती है. जागरूकता की कमी के कारण लगभग तीन चौथाई लोग आवश्यक ट्रीटमेंट से वंचित हैं. लोगों की सोच को बदलने और रोग के प्रति जागरूक करने हेतु हर वर्ष 17 नवंबर को ‘नेशनल एपिलेप्सी डे’ मनाया जाता है. इसके माध्यम से शहरों, गांव और कस्बे में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
वही समाजिक कार्यकर्ता योगा शिक्षक अरुणा निर्मलकर ने योग के माध्यम से बच्चो को जानकारी दी और मिर्गी के लक्षणों, कारणों और उपचार के बारे में जानकारी दी,,
वही सामजिक कार्यकर्ता मुकेश तिवारी ने कहा किन राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाने की शुरुआत 2015 में हुई थी. इंटरनेशनल ब्यूरो और इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी द्वारा इसे आयोजित किया गया था. इस दिन देशभर में लोगों को मिर्गी के लक्षणों, कारणों और उपचार के बारे में जानकारी दी जाती है साथ ही लोगों को अपना अनुभव शेयर करने को मौका भी दिया जाता है.
बता दे कि यह कार्यक्रम शहर के मध्य स्थित जस्टिस तन्खा मेमोरियल स्कूल में बच्चो के साथ मनाया गया इस कार्यक्रम में स्कूल प्राचार्य शिक्षकगण व स्पेशल बच्चे शामिल हुए ,