वन अधिकार पट्टा के नाम पर अवैध वसूली करने वाले वन रक्षक पर विभाग हुआ मेहरबान
गांव वाले कार्यवाही को लेकर बेबस अब तक किसी ने नहीं ली सुध
कसडोल। विभाग का संरक्षण कहे या उदासीनता वन-अधिकार पत्र में जमीन नाप-जोक के नाम पर ग्राम तालाझर के ग्रामीणों से लाखों रुपयों की अवैध उगाही करने वाले वन-रक्षक महेश चेलक पर ठोस कार्यवाही नहीं होने से गांव का शासन पर से भरोसा उठता प्रतीत होता है।दशकों से यहाँ निवासरत वन ग्रामवासी अपनी बुनियादी सुविधाओं से पिछड़ा हुआ है।खेती-किसानी ही इन ग्राम वासियों का आय का मुख्य स्रोत रहा है।यह गांव कसडोल ब्लॉक से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बलौदाबाजार वन-मंडल के अंतर्गत लवन परिक्षेत्र के बिलाईगढ़ विधानसभा के अंतिम छोर में बसा है।गाँव-वालों के बताये अनुसार पूरा मामला यह है कि वन ग्राम तालाझर के किसानों का अब तक छूटे हुए जमीनों का नाप-जोक नहीं होने से सरकार की महत्वकांक्षी योजना वन अधिकार पत्र पाने से वंचित होना पड़ रहा है।केवल इसलिए कि ग्राम तालाझर में पदस्थ वन रक्षक महेश चेलक द्वारा पैसों की मांग करने पर गांव वाले किसान पैसे देने में असमर्थ हैं।तालाझर के किसानों का कहना है कि वन रक्षक महेश चेलक हम गांव वालों को पैसे की मांग कर आये दिन धमकी-चमकी देता है।किसानों का कहना है कि वन अधिकार पट्टा दिलाने के नाम पर वन रक्षक महेश चेलक ने हम 57 किसानों से 3 लाख रुपये की अवैध उगाही की है।इसके बावजूद भी जमीनों के नाप-जोंक करने के एवज में किसानों से दारू,मुर्गा मछली खाने-पीने में 70 हजार मोटा रकम खर्च होने की बात बताई।
गांव वालों ने बताया कि वन रक्षक महेश चेलक कहता है कि क्या दिक्कत है हो जाएगा क्या दिक्कत है ऐसे बोलते-बोलते आज पूरा गांव वालों को दिक्कत में डाल दिया है। इसके बावजूद भी प्रत्येक किसानों की भर्री जिसमें दलहन-तिलहन बोया हुए भूमि को नाप कर वन अधिकार पट्टा में चढ़ाने की एवज में 1 से 2 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मांग किया,पैसे नहीं देने पर जमीन का नापजोंक नहीं किया।इस मामले से जुड़े इससे पहले जानकारी साझा की तो लवन परिक्षेत्र अधिकारी अनिल वर्मा ने अनभिज्ञता जाहिर की थी।वही इस पर वन रक्षक महेश चेलक ने कहा कि मुझे गांव वाले जबरन फसाना चाहते हैं।गांव वालों से मैंने कोई पैसा की मांग नहीं की है और न लिया हूँ।फिलहाल यह पूरा मामला जांच का विषय।जो त्वरित तौर से होना चाहिए।