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विश्व अल्जाइमर दिवस विशेष मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर दीप्ति ने बताया कैसे बढ़ता है ये रोग,

विश्व अल्जाइमर दिवस विशेष  मनोरोग चिकित्सक डॉक्टर दीप्ति  ने बताया कैसे बढ़ता है ये रोग,

बिलासपुर । विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर डॉक्टर दीप्ति ने अपने सुनामी छत्तीसगढ़ मीडिया के साथ विचार व्यक्त किया आइये जानते है क्या कहा उन्होंने  बताया कि प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को "विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है प्रत्येक वर्ष अल्जाइमर पर एक थीम बनाया जाता है इसी थीम के आधार पर लोगों को जागरूक किया जाता है वर्ष 2021 में अल्जाइमर दिवस का थीम Know Dementia, Know Alzheimer’s था इस साल पूरी दुनिया में 11वां अल्जाइमर दिवस मनाया जा रहा है जिसका थीम"ज्ञान की शक्ति (Power of Knowledge)"है।

उन्होंने बताया कि सबसे पहले जर्मन मनोचिकित्सक डॉ. अलोइस अल्जाइमर ने अल्जाइमर बिमारी की खोज़ की बाद में इन्हीं के नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया। उन्होंने सन् 1901 में अपने इलाज के दौरान 50 वर्षीय महिला रोगी के भीतर इस बीमारी की पहचान की। पहली बार विश्व अल्जाइमर दिवस साल 2012 में मनाया गया था, जिसके बाद से प्रत्येक वर्ष अल्जाइमर दिवस 21 सितम्बर को मनाया जाने लगा है। 

अल्जाइमर बीमारी को 'भूलने की बीमारी' भी कहा जाता है। इसे डिमेंशिया का भी एक रूप माना जाता है। यह एक न्यूरोडीजेनेरेटिव (neurodegenerative) बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचता है।
ICD-10 के अनुसार इसे F00 से F09 के वर्गीकरण मे रखा गया है। जिसमें F00 अल्जाइमर डिसीज मे डिमेन्शिया को बताया गया है।
रोगियों में सामान्यतौर पर ये दिक्कतें देखी जाती रही हैं:-

चीजों को याद रखने में कठिनाईं। लोगों के नाम भूल जाना।

पहले जो कम आसानी से कर लेते थे उसे अब करने में काफी दिक्कत होना। 

समस्याओं का समाधान कर पाने में दिक्कत होना।

बोलने या लिखने में परेशानी।

निर्णय लेने में दिक्कत होना।

मनोदशा और व्यक्तित्व में परिवर्तन।
लोगों को अल्जाइमर बीमारी से बचाने के लिए और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। चूंकि अब यह बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह गई है। एक बार यह बीमारी हो जाए, तो उम्र बढ़ने के साथ बीमारी और भी बढ़ जाती है।
अल्ज़ाइमर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति का दिमाग़ सही तरीके से काम नहीं कर पाता और उसकी याददाश्त बहुत कमज़ोर होती जाती है। इसकी वजह से उनकी दैनिक ज़िंदगी प्रभावित होती है। अल्ज़ाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज़ नहीं है। हालांकि, इससे होने वाले लक्षणों को दवाइयों की मदद से नियंत्रण में लाया जा सकता। 

डॉक्टर दीप्ति ने बताया कि इसे नियंत्रित करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें आहार की पौष्टिकता का खास ख्याल रखें, नट्स का सेवन करें। 
उच्च रक्तचाप, मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल की रोकथाम करते रहें, ये स्थितियां भी न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण हो सकती हैं यदि आप धूम्रपान या शराब पीते हैं तो इसे छोड़ दें, इसे अल्जाइमर रोग को बढ़ावा देने वाले कारकों में से माना जाता है।
प्राणायाम जैसे अभ्यास तंत्रिकाओं और मस्तिष्क को शांत रखकर इन रोगों के विकास के कम करने में मदद कर सकते हैं।


जानें कितनी खतरनाक है ये बीमारी
धीरे-धीरे अल्जाइमर रोग दिमाग के विकार का रूप लेता है और याददाश्त को खत्म करता है।

आम तौर पर अल्जाइमर वृद्धावस्था में होता है. यह 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है.


विश्व अल्जाइमर दिवस  21 सितंबर को मनाया जाता है. यह बीमारी एक उम्र के बाद लोगों में होने लगती है, जिसमें लोग चीजों को याद नहीं रख पाते हैं. उम्र बढ़ने के साथ ही तमाम तरह की बीमारीयां हमारे शरीर को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख बीमारी बुढ़ापे में भूलने की आदतों (अल्जाइमर्स-डिमेंशिया) की है.


उन बुजुर्गों की तादाद लगातार बढ़ रही है, जिन्हें अल्जाइमर है. इसीलिए इस बीमारी से बचाने के लिए हर साल 21 सितंबर यानी आज विश्व अल्जाइमर्स-डिमेंशिया दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य जागरूकता लाना है, ताकि घर-परिवार की शोभा बढ़ाने वाले बुजुर्गों को इस बीमारी से बचाकर उनके जीवन में खुशियां लाई जा सकें. अल्जाइमर्स में दिमाग में होने वाली नर्व सेल्स के बीच होने वाला कनेक्शन कमजोर हो जाता है.

60 साल से अधिक उम्र के लोग ज्यादा प्रभावित
धीरे-धीरे यह रोग दिमाग के विकार का रूप लेता है और याददाश्त को खत्म करता है. ऐसे में बढ़ती उम्र से साथ सोचने की क्षमता भी कम होती जाती है. ये इतना खतरनाक है कि इसमें बुजुर्ग 1-2 मिनट पहले हुए बात को भी भूल जाता है. आम तौर पर अल्जाइमर वृद्धावस्था में होता है. यह 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है. बहुत ही कम केसेस में 30 या 40 की उम्र में लोगों को ये बीमारी होती है.

बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की जरूरत
इस भूलने की बीमारी पर काबू पाने के लिए जरूरी है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ ही मानसिक रूप से अपने को स्वस्थ रखें. नकारात्मक विचारों को मन पर प्रभावी न होने दें और सकारात्मक विचारों से मन को प्रसन्न बनाएं. पसंद का संगीत सुनने, गाना गाने, खाना बनाने, बागवानी करने, खेलकूद आदि जिसमें सबसे अधिक रुचि हो, उसमें मन लगाएं तो यह बीमारी नहीं घेर सकती.

इन परेशानियों से गुजरता पड़ता है
इस बीमारी के कारण व्यक्ति का गुस्सा, चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है. लोग धीरे-धीरे रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजें भूलने लगते हैं. हालांकि, माइंड मैनेजमेंट, हेल्दी लाइफ स्टाइल और नशे से दूरी जैसे एहतियात बरतकर अल्जाइमर और डिमेंशिया से बचा जा सकता है. डिमेंशिया की तरह ही अल्जाइमर्स में भी मरीज को किसी भी वस्तु, व्यक्ति या घटना को याद रखने में परेशानी महसूस होती है और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में भी दिक्कत महसूस होती है.

Mukesh tiwari

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